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Suzhal : The Vortex Review : समय-समय पर अपने सस्पेंस-थ्रिल की वजह से चौंकाती है ये सीरीज

Suzhal : The Vortex Review : अमेजन प्राइम वीडियो ( Amazon Prime Video ) पर 17 जून से तमिल क्राइम थ्रिलर सीरीज 'सूड़ल' स्ट्रीम हो रही है. इस सीरीज को लिखा और डायरेक्ट किया है पुष्कर और गायत्री ने. ये दोनों इससे पहले तमिल में 'विक्रम वेधा' ( Vikram Vedha ) जैसी सुपरहिट फिल्म बना चुके हैं. जिसके हिंदी रीमेक में 'ऋतिक रोशन' और 'सैफ अली  खान' नजर आने वाले हैं. इस विवाहित जोड़ी ने अब सीरीज की तरफ रुख किया है. ' Suzhal ' की कहानी में कई उतार-चढ़ाव हैं. ये एक रहस्यमयी गांव की कहानी है, जहां 'मयान कोल्लई' के त्योहार का माहौल है. एक दिन उस गांव की फैक्ट्री में भीषण आग लग जाती है और उसी रात फैक्ट्री के मजदूर यूनियन के लीडर की बेटी भी गायब हो जाती है. पुलिस जो फैक्ट्री मालिक की हितैषी है वो फैक्ट्री में लगी आग की इन्वेस्टिगेशन करने लगती है लेकिन लड़की के गायब होने की खबर और मजदूरों के दबाव के कारण इन्वेस्टिगेशन का रुख गायब लड़की के केस की तरफ मुड़ जाता है. लड़की की तलाश शुरू हो जाती है जिसके बाद एक-एक करके कई बड़े राज सामने आने लगते हैं.  धीमी शुरुआत के बाद...

Vikram Movie Review : लोकेश कनगराज के क्राइम यूनिवर्स में 'विक्रम' आपका स्वागत करता है

Vikram Movie Review : एक ही दिन तीन बड़ी फिल्मों के रिलीज होने पर मामला पेचीदा हो जाता है. कौन सी फिल्म पहले देखी जाए कौन सी बाद में समझ नहीं आता. थोड़ी देर से ही सही आखिरकार 'सम्राट पृथ्वीराज' ( Samrat Prithviraj ) और 'मेजर' के बाद तीसरी रिलीज फिल्म 'विक्रम' ( Vikram Movie ) का नंबर आ ही गया. फिल्म देख ली गई है और इसी का रिव्यू लेकर हाजिर हुए हैं. ये एक तमिल फिल्म है जिसे हिंदी में भी सिनेमाघरों में रिलीज किया गया है. इसकी हिंदी बेल्ट में मार्केटिंग बहुत साधारण तरीके से हुई. कुछेक जगहों पर कमल हासन ( Kamal Haasan ) खुद जाकर इसका प्रमोशन करते नजर आए. रिलीज के पहले हिंदी में इसका इतना क्रेज नहीं था लेकिन जैसे ही ये रिलीज हुई ये बाकी दो फिल्मों से ज्यादा चर्चा में आ गई. ऐसा क्यों हुआ? इसका कई कारण हैं जो आपको इस रिव्यू के माध्यम से पता चल जाएगा. तो पहले रिव्यू की तरफ आते हैं. कहानी में ड्रग्स का एंगल मुख्य है फिल्म की कहानी की शुरुआत में एक-एक बाद एक कई हत्याएं होती हैं. मारे गए लोगों में अधिकतर पुलिस डिपार्टमेंट के लोग हैं. इन हत्याओं के पीछे कोई नकाबपोश गैंग है. ...

Jana Gana Mana Movie Review : पॉलिटिकल ड्रामा में सस्पेंस और थ्रिल का तड़का

Jana Gana Mana Movie Review : 2 जून को रात बारह बजे पृथ्वीराज सुकुमारन ( Prithviraj Sukumaran ) की मलयालम फिल्म 'जन गण मन' ( Jana Gana Mana Movie ) स्ट्रीम होनी शुरू हो गई और मैंने बिना वक़्त गंवाए देखना शुरू कर दिया. पिछले 2-3 सालों से क्षेत्रीय भाषा खासकर मलयालम भाषा ( Malayalam Movie ) की फिल्मों के प्रति में रुचि बढ़ी है. इसी का असर था जिसकी वजह से इस फिल्म को लेकर अवेयर था. खैर! फिल्म शुरू हुई, शुरुआत होती है एक दर्दनाक हत्या से. एक यूनिवर्सिटी की महिला प्रोफेसर सबा (ममता मोहनदास) को सड़क के किनारे कुछ लोग जिंदा जला देते हैं. जिसके बाद उस प्रोफेसर की यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स हंगामा शुरू देते हैं. पुलिस वर्सेज स्टूडेंट्स वाला मामला हो जाता है. पुलिस कॉलेज कैंपस में घुस कर स्टूडेंट्स को मारती है. इस घटना पर सोशल मीडिया-मीडिया में हंगामा होता है. दबाव में मर्डर के इन्वेस्टिगेशन शुरू हो जाती है. सस्पेंस और थ्रिल का भरपूर डोज है फिल्म में इस इन्वेस्टिगेशन के लिए एसीपी सज्जन कुमार (सूरज वेंजरामुदु) को बुलाया जाता है. इंटरवल तक यही इन्वेस्टिगेशन का पार्ट चलता है. सबा के हत्या और ...

Anek Movie Review : जरूरी फिल्म का गैरजरूरी ट्रीटमेंट

Anek Movie Review : आयुष्मान खुराना ( Ayushmann Khurrana ) की फिल्म 'अनेक' ( Anek ) सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. इस फिल्म का ट्रेलर जब रिलीज हुआ था तब अधिकतर दर्शक इसे लेकर उत्साहित थे. इसकी कुछ वजहें थीं, एक तो आयुष्मान खुराना का लुक और दूसरा अनुभव सिन्हा के द्वारा चुना गया नया विषय. इस बार अनुभव सिन्हा ( Anubhav Sinha ) ने नॉर्थ ईस्ट की समस्याओं और वहां के लोगों के साथ होने वाले भेदभाव पर फिल्म बनाई. जब ट्रेलर ( Anek Movie Trailer ) रिलीज हुआ था तब मैंने इसे एक ज़रूरी फिल्म बताया था क्योंकि विषय ऐसा था जिसे मुख्यधारा में लाया जाना चाहिए था. फिल्म देखने के बाद एहसास हुआ कि एक जरूरी फिल्म में गैरजरूरी ट्रीटमेंट ने सब कबाड़ा कर दिया गया. फिल्म जो भी, जितना भी कहना चाहती थी, उसने कहने की भरसक कोशिश की है लेकिन उसकी कोशिश कामयाब नहीं होती. 'अनेक' अपनी अधूरी बातों से फैसला सुनाने की नाकाम कोशिश करती है. सरकार और बागियों के बीच के जंग की कहानी आइए पहले कहानी की बात करते हैं फिल्म में आयुष्मान खुराना एक स्पेशल एजेंट बने हैं, जिसका नाम अमन है. वो सरकार की नॉर्थ ईस्ट में शां...

Hit The First Case की हिंदी रीमेक के साथ-साथ सीक्वल Hit The 2nd Case भी रिलीज के लिए तैयार

इस रीमेक युग में एक और तेलुगु फिल्म का नंबर आया है, नाम है Hit The First Case . ये फिल्म 2020 में रिलीज हुई थी. बॉक्स ऑफिस पर सफल भी रही थी. फिल्म के हिंदी रीमेक ( Hit Remake ) में राजकुमार राव ( Rajkumar Rao ) और सान्या मल्होत्रा दिखाई देंगे. किसी एक्टर के लिए इस किरदार में करने के लिए बहुत कुछ है लेकिन एक्ट्रेस के लिए इस फिल्म में बस किडनैप होने और बार-बार एक्टर के ख्वाबों में आने भर का ही स्कोप है. इसे डायरेक्ट ओरिजिनल फिल्म के निर्देशक शैलेश कोलानु ही कर रहे हैं. ये अब नॉर्मल बात हो गई है. मेकर्स इस बात की उम्मीद रख रहे हैं कि डायरेक्टर ने जिस भव से ओरिजिनल फिल्म बनाई थी उसी भाव से इसका रीमेक भी बनाएंगे, हालांकि कई रीमेक में मामला गड़बड़ भी हो जा रहा है, जैसे जर्सी के हिंदी रीमेक के साथ हुआ. सीक्वल से पहले हिंदी रीमेक होगी रिलीज इस तेलुगु फिल्म से एक और दिलचस्प फैक्ट जुड़ा है. इस तेलुगु फिल्म का अगला पार्ट Hit The 2nd Case भी रिलीज के लिए एकदम तैयार है. इसके दूसरे पार्ट में अदिवि शेष ( Adivi Sesh ) मुख्य भूमिका में नजर आने वाले हैं. जहां एक तरफ इसका सेकंड पार्ट 29 जुलाई को रिलीज हो...

Bhool Bhulaiyaa 2 : 2022 में बॉलीवुड को ट्रैक पर ले आए कार्तिक आर्यन

 पिछले कुछ दिनों से भूल भुलैया 2 ( Bhool Bhulaiyaa 2 ) को लेकर जबरदस्त हाइप है. इस फिल्म ने पहले दिन 14.11 करोड़, दूसरे दिन 18 करोड़ और तीसरे दिन 23.52 करोड़ के साथ पहले वीकेंड में 55.96 करोड़ ( Bhool Bhulaiyaa 2 Box Office Collection ) की रिकॉर्डतोड़ कमाई कर डाली है. ये कार्तिक आर्यन ( Kartik Aaryan ) की सबसे बड़ी ओपनिंग कमाई वाली फिल्म है. इस साल रिलीज हुई हिंदी फिल्मों में ये ऐसी फिल्म है जिसको लेकर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों में उत्साह नजर आ रहा है. अक्षय कुमार , अजय देवगन, रणवीर सिंह, जॉन अब्राहम और शाहिद कपूर जैसे स्टार्स की फिल्में इस साल अब तक बॉक्स ऑफिस पर ठंडी  ही रही हैं. कई लोगों का मानना था कि बॉलीवुड से दर्शकों का मोहभंग हो गया है. उसी बीच जबरदस्त मार्केटिंग के साथ आती है एक नए स्टार कार्तिक आर्यन की फिल्म 'भूल भुलैया 2'. कुछ दिनों पहले ही मैंने लिखा था कि बॉलीवुड वालों को अपनी मार्केटिंग स्ट्रेटजी पर ध्यान देना होगा. उनके घरेलू मार्केट में दूसरी भाषाओं की फिल्में जबरदस्त कमाई कर रही हैं. इसमें कोई बुराई नहीं लेकिन अगर उनके बॉलीवुड के बड़े स्टार्स की फिल्में उ...

Panchayat Season 2 Review : मोहब्बत ज़िंदाबाद है पंचायत की

Panchayat Season 2 Review : पंचायत का सीजन 2 अच्छा है. इस बार मीम एलिमेंट्स या यूं कहें फन एलिमेंट्स पहले के मुकाबले कम मिलेंगे लेकिन भावनात्मक पक्ष काफी मजबूत है. जीतू भैया इस बार पिछले वाले फॉर्म में नजर नहीं आए हैं लेकिन विकास, प्रहलाद और बवासीर वाले स्लोगन से नाराज 'बनराकस' (भूषण) ने बहुत प्रभावित किया है. प्रधान जी और प्रधान पत्नी दोनों का कोई जोड़ नहीं है. रिंकी की स्माइल और आवाज तो बहुत प्यारी लगी लेकिन रिंकी को ऐसा बुझा-बुझा सा देखना कचोट रहा था. पानी की टंकी पर जिस तरह से पहले सीजन का अंत हुआ था, रिंकी जैसे इंट्रोड्यूस हुई थी लगा था कि इस सीजन रिंकी को बराबर स्पेस मिलेगा पर ऐसा हुआ नहीं.  एक्टिंग जबरदस्त, स्क्रीनप्ले थोड़ा कमजोर अमेजन प्राइम पर रिलीज डेट से 2 दिन पहले आते ही देख लेने के बाद भी इसपर लिखने में मैंने देरी कर दी, वजह थी खराब तबियत. अब थोड़ा संक्षेप में दिल की बात लिख रहा हूँ. इसी पंचायत के पहले सीजन को मोहब्बत बताया था मैंने, वो मोहब्बत अभी भी कायम है. किरदार इस फिल्म के अपने हो चुके हैं. स्क्रीनप्ले वाला पक्ष थोड़ा, बस थोड़ा सा डगमगाया नजर आया. एक्टिंग जबरदस...

शादी इन कोरोना ( पॉर्ट-1)

दूल्हा-दुल्हन समेत घर के 14 सदस्यों के बीच हुई धूमधाम से शादी, हुआ एफआईआर- इस कोरोना महामारी के बीच अज्ञात स्थान पर अज्ञात लोगों द्वारा अज्ञात जोड़े के शादी का आयोजन कर लॉकडाउन और सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों की धज्जियां उड़ाई गयी। सरकार और प्रशासन के मनाही के बावजूद दूल्हा-दुल्हन समेत इस शादी में 14 लोग शामिल हुए। पुलिस को जब इस बात की सूचना मिली तो वो तुरंत इस शादी में पहुंची। बीते अज्ञात दिन, पुलिस को अज्ञात स्थान पर एक शादी के आयोजन की सूचना मिली। पुलिस ने इस पर तुरंत कार्यवाही की। पुलिस के पहुंचने पर शादी की प्रक्रिया जारी थी। पंडित मास्क सरका कर मंत्रोच्चारण में लगे थे।हालांकि पुलिस प्रशासन ने शादी पूरी होने की छूट दे दी। जिसके बाद बचे हुए ढ़ाई फेरे के साथ-साथ शादी की बाकी रस्में पूरी हुईं। इस बीच पुलिस ने नास्ता-पानी कर आयोजकों का मान रखा। कुछ पुलिसकर्मियों ने खाने की उचित प्रबंध ना होने पर थोड़ी नाराजगी भी जाहिर की। शादी पूरी होते ही नवविवाहित जोड़े सहित पूरे परिवार को टाँग कर थाने लाया गया और एफआईआर दर्ज कर ली गयी। अज्ञात आयोजकों द्वारा यह दावा किया गया कि उन्होंने पूरे सरक...

पलायन : महामारी के बीच त्रासदी

कोरोना वायरस के संक्रमण से फैली कोविड-19 बीमारी ने पूरे विश्व को भयभीत कर रखा है। जहां चीन, इटली, फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका जैसे विकसित देश भी इसके सामने घुटने टेकतेदिखाई दे रहे हैं वहीं भारत इस लड़ाई में विजय पाने की पुरजोर कोशिश में लगा हुआ हैं। भारत मे कोरोना संक्रमण की खबरें आते ही भारत सरकार ने इससे लड़ने की तैयारी शुरू कर दी। इसी तैयारी के बीच 22 मार्च को सम्पूर्ण देश मे जनता कर्फ्यू लगा और फिर इस जनता कर्फ्यू के दो दिन बाद 21 दिन के लॉक डाउन की घोषणा हुई। पूरा देश अचानक से रुक गया। भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन्स में ये कहा गया कि जो जहां है वहीं रुका रहेगा। उस तक सारे जरूरी सामान पहुंचाया जाएगा तथा जरूरतमंदों के लिए भोजन एवं रहने का प्रबंध किया जाएगा। कोरोना से लड़ने के लिए ये लॉक डाउन जरूरी तो था लेकिन इस लॉक डाउन ने एक ऐसी जमात को भय में डाल दिया जो इस देश का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भारत के बड़े शहरों के प्रवासी श्रमिकों और दिहाड़ी मजदूरों पर इस फैसले का बड़ा असर हुआ। सारे कारखानें और कंपनियों के बंद हो जाने के कारण इनका रोजगार खत्म हो गया। जो रोज कमाने खाने वाले दिहाड़ी मजद...

क्या सच में न्याय हो गया?

क्या सच में न्याय हो गया? बलात्कार होने से ना रोका जा सका। बलात्कार के बाद कानूनी लड़ाई में भी सहयोग ना दिया जा सका। ना ही प्रशासन और ना ही न्यायिक व्यवस्था की जवाबदेही तय की जा सकी। जमानत पर छूटे आरोपी खुलेआम घूम रहे थे फिर भी पीड़िता को सुरक्षा मुहैया नहीं कराई जा सकी। अब फिर किसी को ज़िंदा जलाया गया है । तो एक काम करो एक और एनकाउंटर कर दो। फिर से देश वाहवाही देगा, फिर देश जश्न मनाएगा, फिर पीड़िता को न्याय मिल जाएगा। इसके बाद फिर अगले अवसर के लिए तैयारी शुरू भी कर देना क्योंकि सुरक्षा तो देने से रहे फिर कोई न कोई जलेगा ही, गोली रिवॉल्वर में लोड रखना हमेशा। और हाँ! एक सवाल का जवाब भी ढूंढ़ते रहना कि क्या सच मे न्याय हो गया? समझ पाओ तो समझ लेना, बात यहाँ क्राइम रोकने की है ना कि क्राइम होने के बाद न्याय की फिल्मी स्क्रिप्ट लिखने की। ना ही उस चीज़ के लिए तालियां बटोरने की जिसे होने ही नहीं देना था, ना ही तालियां बजा कर शोर मचाने की क्योंकि इस शोर की अवधि बड़ी कम होती है। प्रश्न इस समाज के हर सदस्य को अपने आप से पूछने की आवश्यकता है कि कहाँ चूक हो रही है। हालात ये हैं कि सभी ने ए...

D-16 : साउथ की परफेक्ट सस्पेंस थ्रिलर फिल्म

Dhuruvangal Pathinaaru (D-16) मैं हॉटस्टार पर ऐसे ही रोज की तरह कोई फिल्म ढूंढ़ रहा था अचानक से मेरी नज़र 'धुरुवंगल पथिनारू यानी डी-16' फिल्म पर गई। नज़र पड़ते ही मैंने देखना शुरू नहीं किया क्योंकि मैं जब भी कोई ऐसी फिल्म देखता हूँ जिसका नाम पहली बार सुना हो तो पहले उसके बारे चेक करता हूँ कि ये फिल्म देखने लायक है या नहीं। इसपर रेस्पॉन्स अच्छा दिखा तो सोचा देख लूं। पिछले दिनों मैंने बहुत सी साउथ फिल्मों के बारे में जानकारियां जुटाई, उनके बारे में पढ़ा, साउथ की फिल्म्स को लेकर थोड़ी छानबीन भी की ये इसलिए क्योंकि साउथ फिल्मों को लेकर एक मिथ है कि साऊथ में जो टीवी पर मसाला फिल्में दिखती हैं केवल उसी तरह की फिल्में बनती हैं। लेकिन अब इस धारणा से बाहर आना चाहिए। साउथ में कुछ बेहतरीन फिल्में ऐसी हैं जो हमारी पहुंच से दूर हैं क्योंकि बाजार उन्हें स्वीकार नहीं करता। हिंदी में वहीं ज्यादातर उपलब्ध हैं जो आप आये दिनों टीवी पर देखते रहते हैं। कुछ अच्छी फिल्में भी उपलब्ध हैं जो इन रेगुलर मसाला फिल्मों से अलग हैं लेकिन अधिकतर लोगों को उनके बारे में पता ही नहीं और जब पता नहीं तो देखने का रि...

मोदी जी? जवाब चाहिए

तो मोदी जी की इस तस्वीर पर ढ़ेर सारे मीम, ढ़ेर सारे भक्तिमय पोस्ट और ढ़ेर सारे उन क्रांतिकारी चिंतकों के पोस्ट जिन्हें लिखने और बोलने नहीं दिया जाता, को देखने और पढ़ने के बाद निष्कर्ष ये निकला कि मोदी जी जो चाहते थे वो हो गया.. क्या चाहते थे ये सवा सौ करोड़ जनता अपने-अपने हिसाब से तय करे, क्योंकि मोदी जी कुछ भी कहते हैं या यूं कहें बहुत कुछ कहते हैं। _____________________________ अब बाल की खाल और थोड़े सवाल- ●स्वच्छता को किसी भी तरह से प्रोमोट करना गलत या सही? ●नौटंकी तो सब कर रहे हैं बस उचित मंच के सही प्रयोग में मोदी जी माहिर हैं सही या गलत? ●मोदी जी को कैमरे से इतना प्यार है या कैमरे को मोदी जी से? ●मोदीजी की हर एक्टिविटी दिखने से दिक्कत है या उनकी हर एक्टिविटी पर चर्चा होने से? ●क्या मोदी जी के लिए कचरा फ्रेंडली माहौल बनाया गया था? ●मोदी जी प्लास्टिक का थैला घर से मंगवाया था या वहीं पाया था? ●मोदी जी प्लास्टिक वाले थैला में से कचरा फेंक कर प्लास्टिक घर ले गए या प्लास्टिक सहित पूरा कचरा कूड़ेदान में डाल दिया? ●मोदी जी के कपड़ों पर पसीना और रेत छलावा है या हकीकत? ●मोदीजी जी...

कौन सुनेगा दुःख?

क्या कोई सुनना चाहता है वृतांत दुःख का तुम्हारे दुःख का क्या कोई जानना चाहता है कारण दुःख का तुम्हारे दुःख का दुःख तुम्हारा हानिकारक है सुखी आत्माओं के लिए तुम्हारे दुःख का वृतांत उन्हें दुःखी कर देता है उन्हें उजाले से प्रेम है अंधेरा उनका शत्रु है वो अनभिज्ञ हैं इस अंधकार से वो अनभिज्ञ हैं तुम्हारे अंधकारमयी दुःख से कारण है उनके पूर्वजों द्वारा फैलाया डर हाँ! अंधकार का डर क्या अभी भी लगता है तुम्हें कोई सुनना चाहता है वृतांत दुःख का तुम्हारे दुःख का कोई जानना चाहता है कारण दुःख का तुम्हारे दुःख का।                   - दिव्यमान यती

|| फ़्रेंडमेल ||

सुनो! मेरे फ्रेंड लिस्ट की गाड़ी रुकी पड़ी है, कोई सवारी इधर न आ रही है न ही इधर से जा रही है। क्या अघोषित मंदी ने मेरी इस फ्रेंडगाड़ी को भी मंद कर दिया है? मैं इस रिक्वेस्ट-संकट से जूझ रहा हूँ। कभी-कभी महसूस करता हूँ कि जिस वक्त मैंने इसकी शुरुआत की थी तब तो इतने लंबे सफर की कल्पना नहीं कि थी तो आज क्यों मैं इस मंदी से विचलित हो रहा हूँ। लेकिन यकायक कभी किसी रोज कुछ कूल-डूड प्रजातियों की फ्रेंडगाड़ी मेरे सामने से गुजरती है जो सवारियों से खचाखच भरी पड़ी होती है, उनके गाड़ी की गुड़वत्ता दोयम दर्जे के होने के बावजूद भी। आखिर मैं इंसान ही हूँ, इसपर विचार करने से कैसे खुद को रोक लूँ। गहन विचार भी करता हूँ लेकिन किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाता। मन कहता है इस आत्ममुग्धता से बचे रहो, विवेक कहता है इस संकट को समाप्त करो। एक अंतर्द्वंद्व निरंतर प्रभावी रहता है। इस अवस्था मे मन और विवेक के बीच तालमेल बैठाना थोड़ा कठिन मालूम पड़ता है लेकिन इनदोनों के विचारों के बीच एक अपना सशक्त विचार बनाने की कोशिश में लगा रहता हूँ। खैर! गाड़ी का रुकना ये तो नहीं दर्शाता कि वो फिर से कभी चलेगी ही नहीं, उम्मीद र...

भारत को भारत रहने दो..

ये कौन-सा तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग है जो विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के जनमत को स्वीकार करने का साहस नहीं दिखा पा रहा है। आखिर किस अकड़ में,आखिर कौन-सा परम ज्ञान है जो इनको ये यकीन नहीं दिला पा रहा है कि देश की आधे से अधिक आबादी ने ये बहुमत किसी सरकार को दिया है। संविधान में विश्वास का ढ़ोंग क्यों किया जा रहा है? क्यों बार-बार अपनी राजनैतिक लाभ के लिए संवैधानिक संस्थाओं की विश्वनीयता पर ऊँगली उठाई जा रही है? केवल आरोप मात्र से आप किस बुद्धिमत्ता का परिचय दे रहें हैं? आपका संविधान में विश्वास है तो संवैधानिक तरीके से अपनी वैचारिक और राजनैतिक लड़ाई लड़िये। आलोचना और विरोध की एक लक्ष्मणरेखा तय कीजिए जिससे इस समाज और इस देश को कोई क्षति ना हो। अगर आपको लगता है केरल में बीजेपी नहीं आई तो वही एक जगह सबसे बुद्धिजीवियों का है तो ये भी जान लीजिए एक वक़्त था जब बीजेपी कहीं थी ही नहीं, शायद कुछ वर्षों बाद हो सकता है बीजेपी भी ना रहे तब भी देश और जनता वही थी और वही रहेगी। आप अपनी बुद्धिमत्ता का ढ़ोंग उन्हीं के सामने करने में सफल हो पाए जो आपके विचारों से प्रभावित हैं लेकिन देश सिर्फ विचारधाराओं से न...

।। तीन किरदार ।।

कल मैं कॉलेज से लौट रहा था, यूँ तो अक्सर मैं पैदल ही अपने रूम जाया करता था लेकिन कल एक मित्र का साथ निभाने के लिए मैंने लंबे रास्ते का चुनाव किया। मेरे मित्र को मेट्रो पकड़नी थी इसलिए हमारा साथ मेट्रो तक ही रहा और चूँकि मैं थोड़े लंबे वाले रास्ते पर था इसलिए रूम पर आने के लिए मुझे ऑटोरिक्शे का सहारा लेना पड़ा। दोस्त को टा-टा, बाय-बाय बोलने के बाद मैं ऑटोरिक्शे में बैठ गया। ऑटोरिक्शे में बैठने के कुछ देर बाद मेरी नजर सामने वाली सीट पर बैठे एक बेबी कपल पर पड़ी, बेबी कपल इसलिए बोल रहा हूँ क्योंकि उनकी उम्र तकरीबन 16 या 17 साल की ही थी। लड़की कुछ परेशान सी लग रही थी और लड़का बड़ी मासूमियत से उसकी ओर देख उसे अपनेपन का अहसास दे रहा था। लड़की बार-बार उसके कंधे पर सर रखने की कोशिश कर रही थी लेकिन विश्व के महान चालकों में से एक ऑटो वाले भैया अपनी ब्रेक मारक कला से उस लड़की के इरादे पर पानी फेरे जा  रहे थे। फिर भी लड़की थोड़ी देर के लिए ही सही अपने प्रेमी के कंधे पर सर रखने में कामयाब हो ही जाती थी। लड़की जब उस लड़के के कंधे पर सर रखती लड़का उसके सर पर हाथ फेर उसे आराम देने की कोशिश करने ल...

Kesari Movie Review : 36 सिख बटालियन के 21 सिखों की बेहतरीन शौर्य गाथा

कलाकार-  अक्षय कुमार, परिणीति चोपड़ा, राकेश चतुर्वेदी, विक्रम कोचर, इत्यादि लेखक- गिरीश कोहली निर्देशक- अनुराग सिंह रेटिंग-⭐⭐⭐⭐ Kesari Movie Review : इतिहास में कई ऐसी महान घटनाएं हैं जिनके बारे में आम लोगों को बहुत कम या ना के बराबर जानकारी होती है। सिनेमा ऐसा साधन है जिसकी पहुँच आम इंसान तक है और सिनेमा अपने माध्यम से लोगों के बीच ऐसी कहानियां मनोरंजक तरीके से हमेशा से पहुंचाता रहा है। अक्षय कुमार की फिल्म केसरी भी इतिहास की एक ऐसी ही महान गाथा का सिनेमाई संस्करण है। एक ऐसी गाथा जिसने सबको आश्चर्यचकित कर दिया था। फिल्म की कहानी शुरू होती है हवलदार ईशर सिंह (अक्षय कुमार) और उनके साथी गुलाब सिंह (विक्रम कोचर) के हंसी-ठिठोलों से। दोनों ही अफगानिस्तान और भारत की सीमा पर स्थित गुलिस्तान के किले में तैनात रहते हैं जहाँ अफगानों की नज़र रहती है। एक दिन सीमा पर एक मौलवी (राकेश चतुर्वेदी) के साथ भारी संख्या में अफगानी, एक औरत को उसके पति की खिलाफत करने के जुर्म में उसका गला काटने की कोशिश करते हैं। जिसे ईशर सिंह बर्दाश्त नहीं कर पाता है और अंग्रेज अफसरों के मना करने के बावजू...

।। तुम्हें बुखार है।।

|| तुम्हें बुखार है || शरीर का एक-एक हिस्सा दर्द से जूझ रहा है, वातावरण ठंडा तो शरीर गरम प्रतीत हो रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे सर पर एक भारी गठरी किसी ने मेरी इजाज़त के बगैर रख दी है। आँखों की चुभन खट्टे-मीठे एहसास दिला रही है। कानों में अजीब सी खामोश आवाजें दस्तक दे रही हैं। नाक निरंतर हो रहे जल प्रवाह का गवाह बना हुआ है। सूखे होंठ कपकपा रहे हैं मानों ये होंठ बिना किसी कसूर के सजा भुगत रहे हों। स्वर भारी हो चले हैं जैसे गज़ल गाने की तैयारी कर रहे हों। मन में असंख्य सवाल समंदर की लहरों की भांति हलचल मचा रहे हैं।  इस व्यथा को सुन कर सब एक ही बात बार-बार बोल रहे हैं,"तुम्हे बुखार है।" PC- Google

May I help you? ( मे आई हेल्प यू?)

Womans_day_special  Short story (लघुकथा)👇 ●May i help you (मे आई हेल्प यू) बस स्टॉप पर खड़े हुए बहुत समय हो गया था, वहां बहुत से लोग बस का इंतज़ार कर रहे थे, मै भी उन लोगों में से एक था जिसे बस का बेसब्री से इंतजार था। मैंने देखा मुझसे कुछ दूर पर खड़ी एक लड़की जो थोड़ी जानी-पहचानी सी लग रही थी, बहुत वक़्त से कुछ बेचैन सी थी, शायद उसे कोई परेशानी थी। मुझे बार-बार ये एहसास हो रहा था कि वो मुझसे कुछ कहना चाहती थी लेकिन संकोचवश कुछ कह नहीं पा रही थी। शायद वो मुझे अच्छे से पहचानती भी थी। उसने आख़िरकार मुझसे आ कर बोल ही दिया, "आप विजयनगर कॉलोनी में रहते हैं ना" मैंने जवाब दिया,"हाँ मै वही रहता हूँ", "मैंने आपको देखा है वहां", उस लड़की ने कहा, "आपका घर मंटू के किराने की दुकान के पास है। मैंने हाँ में जवाब दिया और उससे पूछ लिया, "तुम्हे क्या कोई परेशानी है, बहुत देर से देख रहा हूँ कुछ परेशान लग रही हो।" ये सुनते ही उसने तपाक से जवाब दिया, "आप ये जानते हुए भी कि मै बहुत परेशान हूँ, अकेली हूँ, फिर भी आपने मुझसे पूछना जरूरी नहीं समझा। ...

Rahul Dravid : वो दीवार जिसे कोई ना भेद पाया, महान राहुल द्रविड़

# महान_राहुल_द्रविड़  महान सिर्फ इसलिए नहीं कि उन्होंने इतने ढ़ेर सारे रन बनाएं, इतने ढ़ेर सारे कैच पकड़े, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे। बल्कि महान इसलिए कि ये जो इतने सारे रन बनाए ये उन मुश्किल हालातों में बनाएं जहाँ रन बनाना किसी पहाड़ तोड़ने से कम नहीं था, ये ढ़ेर सारे कैच ऐसे कैच थे जिन्हें पकड़ पाना आम फील्डर के बस की बात नहीं थी और कप्तान उन हालातों में रहे जब भारतीय टीम बुरे हालात में थी। जब भारतीय टीम के पुतले फूंके जा रहे थे, जब खिलाडियों के घरों पर हमले किये जा रहे थे। इन सब से अलग एक बेहद ही सौम्य और शांत खिलाड़ी जब आक्रामक होता था तब अपने बल्ले से निकली 'टक' की आवाज से विरोधियों के गालों पर थप्पड़ मारता था। जिससे उलझने से पहले गेंदबाज ये सोचता था कि इसका भुगतान हमें लंबी पारी के रूप में भुगतना पड़ सकता है। लोगों के चौकों-छक्कों की चर्चाओं के बीच एक ऐसा शख्स था जिसके डिफेंस की चर्चा होती थी, जिससे कट शॉट की चर्चा होती थी। मेरा क्रिकेट का लगाव कितना पुराना है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मैं इस खिलाड़ी के सबसे महत्वपूर्ण और महान दौर का गवाह बना। जिस दि...