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।। तीन किरदार ।।

कल मैं कॉलेज से लौट रहा था, यूँ तो अक्सर मैं पैदल ही अपने रूम जाया करता था लेकिन कल एक मित्र का साथ निभाने के लिए मैंने लंबे रास्ते का चुनाव किया। मेरे मित्र को मेट्रो पकड़नी थी इसलिए हमारा साथ मेट्रो तक ही रहा और चूँकि मैं थोड़े लंबे वाले रास्ते पर था इसलिए रूम पर आने के लिए मुझे ऑटोरिक्शे का सहारा लेना पड़ा। दोस्त को टा-टा, बाय-बाय बोलने के बाद मैं ऑटोरिक्शे में बैठ गया। ऑटोरिक्शे में बैठने के कुछ देर बाद मेरी नजर सामने वाली सीट पर बैठे एक बेबी कपल पर पड़ी, बेबी कपल इसलिए बोल रहा हूँ क्योंकि उनकी उम्र तकरीबन 16 या 17 साल की ही थी। लड़की कुछ परेशान सी लग रही थी और लड़का बड़ी मासूमियत से उसकी ओर देख उसे अपनेपन का अहसास दे रहा था। लड़की बार-बार उसके कंधे पर सर रखने की कोशिश कर रही थी लेकिन विश्व के महान चालकों में से एक ऑटो वाले भैया अपनी ब्रेक मारक कला से उस लड़की के इरादे पर पानी फेरे जा  रहे थे। फिर भी लड़की थोड़ी देर के लिए ही सही अपने प्रेमी के कंधे पर सर रखने में कामयाब हो ही जाती थी। लड़की जब उस लड़के के कंधे पर सर रखती लड़का उसके सर पर हाथ फेर उसे आराम देने की कोशिश करने ल...

Kesari Movie Review : 36 सिख बटालियन के 21 सिखों की बेहतरीन शौर्य गाथा

कलाकार-  अक्षय कुमार, परिणीति चोपड़ा, राकेश चतुर्वेदी, विक्रम कोचर, इत्यादि लेखक- गिरीश कोहली निर्देशक- अनुराग सिंह रेटिंग-⭐⭐⭐⭐ Kesari Movie Review : इतिहास में कई ऐसी महान घटनाएं हैं जिनके बारे में आम लोगों को बहुत कम या ना के बराबर जानकारी होती है। सिनेमा ऐसा साधन है जिसकी पहुँच आम इंसान तक है और सिनेमा अपने माध्यम से लोगों के बीच ऐसी कहानियां मनोरंजक तरीके से हमेशा से पहुंचाता रहा है। अक्षय कुमार की फिल्म केसरी भी इतिहास की एक ऐसी ही महान गाथा का सिनेमाई संस्करण है। एक ऐसी गाथा जिसने सबको आश्चर्यचकित कर दिया था। फिल्म की कहानी शुरू होती है हवलदार ईशर सिंह (अक्षय कुमार) और उनके साथी गुलाब सिंह (विक्रम कोचर) के हंसी-ठिठोलों से। दोनों ही अफगानिस्तान और भारत की सीमा पर स्थित गुलिस्तान के किले में तैनात रहते हैं जहाँ अफगानों की नज़र रहती है। एक दिन सीमा पर एक मौलवी (राकेश चतुर्वेदी) के साथ भारी संख्या में अफगानी, एक औरत को उसके पति की खिलाफत करने के जुर्म में उसका गला काटने की कोशिश करते हैं। जिसे ईशर सिंह बर्दाश्त नहीं कर पाता है और अंग्रेज अफसरों के मना करने के बावजू...

।। तुम्हें बुखार है।।

|| तुम्हें बुखार है || शरीर का एक-एक हिस्सा दर्द से जूझ रहा है, वातावरण ठंडा तो शरीर गरम प्रतीत हो रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे सर पर एक भारी गठरी किसी ने मेरी इजाज़त के बगैर रख दी है। आँखों की चुभन खट्टे-मीठे एहसास दिला रही है। कानों में अजीब सी खामोश आवाजें दस्तक दे रही हैं। नाक निरंतर हो रहे जल प्रवाह का गवाह बना हुआ है। सूखे होंठ कपकपा रहे हैं मानों ये होंठ बिना किसी कसूर के सजा भुगत रहे हों। स्वर भारी हो चले हैं जैसे गज़ल गाने की तैयारी कर रहे हों। मन में असंख्य सवाल समंदर की लहरों की भांति हलचल मचा रहे हैं।  इस व्यथा को सुन कर सब एक ही बात बार-बार बोल रहे हैं,"तुम्हे बुखार है।" PC- Google

May I help you? ( मे आई हेल्प यू?)

Womans_day_special  Short story (लघुकथा)👇 ●May i help you (मे आई हेल्प यू) बस स्टॉप पर खड़े हुए बहुत समय हो गया था, वहां बहुत से लोग बस का इंतज़ार कर रहे थे, मै भी उन लोगों में से एक था जिसे बस का बेसब्री से इंतजार था। मैंने देखा मुझसे कुछ दूर पर खड़ी एक लड़की जो थोड़ी जानी-पहचानी सी लग रही थी, बहुत वक़्त से कुछ बेचैन सी थी, शायद उसे कोई परेशानी थी। मुझे बार-बार ये एहसास हो रहा था कि वो मुझसे कुछ कहना चाहती थी लेकिन संकोचवश कुछ कह नहीं पा रही थी। शायद वो मुझे अच्छे से पहचानती भी थी। उसने आख़िरकार मुझसे आ कर बोल ही दिया, "आप विजयनगर कॉलोनी में रहते हैं ना" मैंने जवाब दिया,"हाँ मै वही रहता हूँ", "मैंने आपको देखा है वहां", उस लड़की ने कहा, "आपका घर मंटू के किराने की दुकान के पास है। मैंने हाँ में जवाब दिया और उससे पूछ लिया, "तुम्हे क्या कोई परेशानी है, बहुत देर से देख रहा हूँ कुछ परेशान लग रही हो।" ये सुनते ही उसने तपाक से जवाब दिया, "आप ये जानते हुए भी कि मै बहुत परेशान हूँ, अकेली हूँ, फिर भी आपने मुझसे पूछना जरूरी नहीं समझा। ...

Rahul Dravid : वो दीवार जिसे कोई ना भेद पाया, महान राहुल द्रविड़

# महान_राहुल_द्रविड़  महान सिर्फ इसलिए नहीं कि उन्होंने इतने ढ़ेर सारे रन बनाएं, इतने ढ़ेर सारे कैच पकड़े, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे। बल्कि महान इसलिए कि ये जो इतने सारे रन बनाए ये उन मुश्किल हालातों में बनाएं जहाँ रन बनाना किसी पहाड़ तोड़ने से कम नहीं था, ये ढ़ेर सारे कैच ऐसे कैच थे जिन्हें पकड़ पाना आम फील्डर के बस की बात नहीं थी और कप्तान उन हालातों में रहे जब भारतीय टीम बुरे हालात में थी। जब भारतीय टीम के पुतले फूंके जा रहे थे, जब खिलाडियों के घरों पर हमले किये जा रहे थे। इन सब से अलग एक बेहद ही सौम्य और शांत खिलाड़ी जब आक्रामक होता था तब अपने बल्ले से निकली 'टक' की आवाज से विरोधियों के गालों पर थप्पड़ मारता था। जिससे उलझने से पहले गेंदबाज ये सोचता था कि इसका भुगतान हमें लंबी पारी के रूप में भुगतना पड़ सकता है। लोगों के चौकों-छक्कों की चर्चाओं के बीच एक ऐसा शख्स था जिसके डिफेंस की चर्चा होती थी, जिससे कट शॉट की चर्चा होती थी। मेरा क्रिकेट का लगाव कितना पुराना है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मैं इस खिलाड़ी के सबसे महत्वपूर्ण और महान दौर का गवाह बना। जिस दि...

2018 विशेष... 2019 शेष

पुराने वर्ष में बहुत सी बातें हुई, बहुत अच्छे-अच्छे लोगों से मुलाकातें भी हुई। जिन्हें दूर से जानता-समझता था उनके करीब आकर उन्हें जानने-समझने का मौका मिला.. कुल मिलाकर वर्ष 2018 मेरे लिए खास इसलिए रहा क्योंकि इस वर्ष मैंने हर चीज़ का थोड़ा-थोड़ा स्वाद लिया, थोड़ी खुशियां, थोड़ा ग़म, थोड़ा साहस, थोड़ा डर।  बहुत सारे दोस्त मिले, इनमें से कुछ बहुत अच्छे दोस्त बने। दिल्ली आने की ख्वाहिश थी और दिल्ली के करीब आ भी गया। कभी-कभार दिल्ली आना-जाना भी लगा रहता है। दिल्ली के दिल में जगह बनाने की पुरजोर कोशिश चल रही है और भरोसा है ये कोशिश जल्द ही कामयाब होगी। इस वर्ष की हर बात खास रही, शुरुआत तो बड़ी नीरस हुई थी,एक निराश-हताश डरे हुए दिव्यमान के साथ जिसमें आत्मविश्वास नाम की कोई चीज़ ही नहीं थी। जो हालातों से डर रहा था। जो दुनिया से भाग रहा था, अपने परिवार-रिश्तेदार से भाग रहा था। बचपन के दोस्तों के साथ चाह कर भी अपने दिल की बात नहीं कह पा रहा था। लेकिन वक़्त ने करवट ली और उसे 3 साल के लंबे इंतजार के बाद दिल्ली के करीब आने का मौका मिला। जो लड़का आजतक कोई एंट्रेन्स एग्जाम ...

2.0 Movie Review : 2.0 वीएफएक्स है असली हीरो

कलाकार- रजनीकांत, अक्षय कुमार, एमी जैक्सन, आदिल हुसैन, इत्यादि लेखक और निर्देशक - शंकर अवधि - 2 घंटा 30 मिनट रेटिंग - 3.5/5 आज दर्शकों की अपेक्षाएं इतनी ज्यादा बढ़ गयी हैं कि उनकी पसंद के स्तर तक पहुँच पाना आज के फ़िल्म निर्माताओं की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। हॉलीवुड की हजारों करोड़ की फिल्मों से भारत की फिल्मों की तुलना थोड़ी बेमानी तो लगती है लेकिन दर्शक ना चाहते हुए भी वही उम्मीद लगा बैठते हैं। ठीक वही उम्मीद 2.0 फ़िल्म के साथ दर्शकों ने लगा रखी थी। फ़िल्म रिलीज़ भी  हो गयी और दर्शकों के बीच आ भी गयी। जहाँ दर्शक आजकल लगभग 3000 हजार करोड़ की बनी हॉलीवुड की 'एवेंजर इनफिनिटी वार' देख रहे हैं। वही दूसरी ओर लगभग 550 करोड़ में बनी भारतीय फ़िल्म 2.0 क्या उनकी उम्मीदों पर खरी उतर पाती है? आइये जानने की कोशिश करते हैं। कहानी- फ़िल्म की कहानी शुरू होती है एक ओनिर्थोलॉजिस्ट यानी पक्षियों के विशेषज्ञ वैज्ञानिक पक्षी राजन (अक्षय कुमार) की मोबाइल टॉवर पर चढ़ कर आत्महत्या करने से। जिसके बाद पूरे शहर से मोबाइल फोन अचानक से गायब होने लगते हैं। फिर प्रोफेसर वशीकरण (रजनीकांत) को इस आश...