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एडवेंचरस शौच

वो सुबह-सुबह उठकर लोटे में पानी लिए कच्ची-पक्की, मोटी-पतली पगडण्डी से होते हुए अपने परम मित्रों के साथ दूर सरेह (जहाँ दूर-दूर तक खेत हों) में एडवेंचरस शौच के लिए जाना अब इतिहास की बातें हो गयी। खुले में शौच की पुरानी दास्ताँ अपने आने वाली पीढ़ी को सुनाया जायेगा क्योंकि हमारा वो एडवेंचर इस समाज के लिए हानिकारक था। #खुले_में_शौच #स्वच्छ_गाँव #दिव्य

◆वो सरकार बनाये जा रहे हैं◆

◆ वो उपचुनाव जीतते जा रहे हैं, ये सरकार बनाये जा रहे हैं। वो इटली घुमे जा रहे हैं, ये जनता को संबोधित किये जा रहे हैं। वो शूट-बूट छोड़ सूती में वोट मांगे जा रहे हैं, ये भगवा शूट-बूट में जनता के वोट हथिया रहे हैं। अब उनकी खटिया छोड़ो, उनके रस्सी घिसे जा रहे हैं, नया विपक्ष खड़ा करो, पुराने अब पीछे छूटे जा रहे हैं। अब भरम से बाहर निकलो भैया, जनता जाग रही है अच्छे-बुरे में फ़र्क अब नेताओं को समझाये जा रहे हैं।                        ~ दिव्यमान यती

आओ! होली कुछ ऐसे मनाते हैं

◆आओ! होली कुछ ऐसे मनाते हैं◆ आओ! होली इसबार साथ मनाते हैं, एक-दूसरे को गुलाल लगा कर, नफ़रत की होली खेलने वालों को मोहब्बत की होली सिखाते हैं.., आओ! होली कुछ ऐसे मानते हैं, पुरे देश को लाल, हरा, पीला, केसरिया हर रंग में रंगवाते हैं। इन रंगों वाले मज़हब को रंगों में मिलाते हैं, गले मिल, गुलाल लगा कर गिले-शिकवे मिटाते हैं आओ! होली कुछ ऐसे मनाते हैं। एक ही सुर,लय, ताल में फागुन के गीत गाते हैं, कुछ तुम हमें, कुछ हम तुम्हें इन रंगों का मतलब बताते हैं, होली की दिलचस्प कहानियाँ बुजुर्गों के पिटारों से निकलवाते हैं। आओ! होली कुछ ऐसे मानते हैं। #दिव्यहोली

मंदिर\मस्जिद वही बनायेंगे...

हम जमीन क्यों छोड़े वो जमीन हमारी है, वहां मेरा खुदा\भगवान रहेगा। हम मंदिर\मस्जिद वही बनायेंगे, हम शांति प्रिय कौम\धर्म हैं लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे भले ही हमें अपना खून ही क्यों ना बहाना पड़े। हाँ भाई हमारा ईश्वर\अल्लाह इसी इंतजार में तो है हम अपने खून को बालू में मिलाकर अपनी अस्थियों को परत दर परत सजा कर एक बहुत ही सुन्दर शांति का सन्देश देने वाला मंदिर\मस्जिद बनायेंगे। ईश्वर\खुदा तो हमारी लाशों पर अपना आसन चाहता है। #मंदिर_मस्जिद #भगवान_खुदा (अफसोस तुम अपने भगवान\खुदा को समझ ही नहीं पाये वो कब का तुम्हारी नफ़रतों की दुनिया से दूर चले गए उन्हें वापस बुलाना है या नहीं ये तुम पर ही निर्भर है)🙏🙏🙏🙏 #दिव्यमान

●आज़ाद ज़िस्म गुलाम सोच●

                ●आज़ाद ज़िस्म गुलाम सोच● जिस तिरंगे के लिये देश की सरहद पर  जवान ख़ुशी-ख़ुशी गोली खा लेते हैं आज वही तिरंगा देश के अंदर ही एक व्यक्ति की मौत की वजह बन गया। आपके पास तिरंगा है तो उसे घर में रखिये बाहर लेकर निकले तो आप पर पत्थर फेकें जायेंगे, गोलियाँ भी चलायी जा सकती हैं। आज़ादी के लिये हमारे स्वतंत्रता सेनानी तिरंगे को थामें अंग्रेजों से लोहा लेते थे वो आज़ादी के वक़्त की बात थी वो बात पुरानी हो गयी आज नया दौर है और भाई नयी कहानी भी तो लिखनी है। हम 'वन्देमातरम' क्यों बोले, हम 'भारतमाता की जय' भी क्यों बोले, हम तो राष्ट्रगान पर भी नहीं खड़े होंगे, ये सब आजादी से पहले स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किया जाता था।आज हम आज़ाद हैं हम अपनी मर्जी का करेंगें। वो आज़ादी के वक़्त की बात थी जब लोगों का मजहब या धर्म एक था "आज़ादी"। आज मजहब और धर्म अलग है भाई, कितनी बार कहा जाये भाईचारे की बात बार-बार ना किया करो। आज 'खान' का भाई 'खान' है और 'पाण्डेय' का भाई 'पाण्डेय' है। हम आजाद हैं.. हम आजाद हैं..हाँ हम आजाद हैं हम आग लगाएंगे, हम ...

तीन तलाक

तीन तलाक़ या एक मज़ाक। एक बार एक मुस्लिम महिला के पति ने उनको तलाक़ दे दिया। वो महिला अपने दिल में कसक लिये कि क्या वज़ह थी जो मेरे मोहब्बत के रिश्ते को एक पल में तोड़ दिया गया, वो अपने बच्चों के साथ अपने पति का घर छोड़ के चली गयी। उनके बच्चे ने अपने पिता से पूछा," अब्बु आखिर क्यों आप मेरी माँ को छोड़ रहे हो, आप ये ठीक नहीं कर रहे हो,  ये इंसानियत नहीं है। यही बच्चा जब बड़ा हो गया तो उसने वही कहानी दोहराई जो उसके पिता ने किया था। तो क्या वो बच्चा अपनी माँ का दर्द भूल गया? अब इस सवाल का जवाब वो बच्चा ही दे पायेगा जो अब बड़ा हो गया है। #सोचनीय नोट- ये मेरी सोच है हो सकता है आप इससे इत्तेफ़ाक़ न रखते हों।                        - दिव्यमान यती

नेहरा जी का प्रेरणादायक सफ़र।

भारत का दिग्गज क्रिकेटर आशीष नेहरा जिन्हें उनके साथी खिलाड़ी नेहरा जी के नाम से बुलाते थे, उनका 1 नवंबर 2017 को अंतराष्ट्रीय क्रिकेट का सफ़र ख़त्म हो गया। 1999 में अंतराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत करने वाले नेहरा जी का सफ़र बहुत मुश्किलों भरा रहा, इन 18 साल के लंबे कैरियर में उनकी लगभग 15 सर्जरी हुयी। वो कभी भी टीम से ख़राब फॉर्म के कारण बाहर नहीं हुए बल्कि सिर्फ इंजरी की वजह से बाहर हुए। 1999 में मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में अपना टेस्ट कैरियर शुरू किया था नेहरा जी ने लेकिन फिर भी सिर्फ 17 टेस्ट ही खेल पाये जिनमें 44 विकेट उनके नाम रहे। वो कई कप्तानों की कप्तानी में खेले, वो सौरव गांगुली की कप्तानी में 2003 विश्वकप भी खेले और भारत को फाइनल में पहुँचाने में अहम योगदान भी निभाया। वो भारतीय टीम से अंदर-बाहर होते रहे लेकिन हर बार उन्होंने टीम में वापसी की। नेहरा जी ने भारत के लिए 120 वनडे मैच खेले और 157 विकेट लिए हैं। 2011 के विश्वकप विजेता टीम के भी हिस्सा रहे नेहरा जी ने इसी टूर्नामेंट में अपना आखिरी एकदिवसीय मैच खेला वो भी पाकिस्तान के विरुद्ध, उस मैच में फिर उनको इंजरी हो गयी जिस...